Author name: Nitish kumar

Science

भोजन के घटक || Components Of Food

भोजन क्या हैं? वे सभी खाद्य पदार्थ जिन्हें हम जीवित रहने, ऊर्जा पाने, शारीर के विकास और टूट-फुट की मरम्मत आदि के लिए खाते हैं परन्तु उससे शरीर को कोई हानि नहीं होता हैं, भोजन कहलाता हैं| भोजन के मुख्या स्रोत: भोजन के मुख्य स्रोत पेड़-पौधें तथा जन्तुएँ हैं| पेड़-पौधों से प्राप्त भोजन: सब्जी, दाल, चावल, गेहूँ, फल, साक आदि पौधों से प्राप्त भोजन के मुख्या स्रोत हैं| जंतुओं से प्राप्त भोजन: दूध, अंडा और माँस जंतुओं से प्राप्त भोजन हैं| पोषक तत्त्व: विभिन्न प्रकार के खाद्य सामग्रियों में हमारे शारीर की वृद्धि, विकास,टूट-फुट की मरम्मत, ऊर्जा पाने एवं स्वस्थ रहने के लिए कुछ आवश्यक अवयव होते हैं| इन अवयवों को पोषक-तत्त्व कहते हैं| जैसे- कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन इत्यादि| पोषक तत्त्व के प्रकार: पोषक-तत्व सात प्रकार के होते है- कार्बोहाइड्रेट 2. वसा 3. प्रोटीन      4. विटामिन      5. खनिज-लवण     6. जल     7. आहारी रेशा विभिन्न खाद्य पदार्थों की जाँच: 1. मंड के लिए परीक्षण: सबसे पहले खाद्य पदार्थ या कच्ची सामग्री का थोड़ी मात्रा लीजिए| इसमें तनु आयोडीन विलयन की 2 या 3 बूँदें डालिए| खाद्य पदार्थ के रंग में परिवर्तन आयेगा और वह नीला या काला हो जाएगा| यह नीला या काला रंग, मंड की उपस्थिति को दर्शाता हैं| 2. प्रोटीन के लिए परीक्षण: सबसे पहले खाद्य पदार्थ की थोड़ी मात्रा लीजिए| यदि वह ठोस हैं तो पहले उसका पेस्ट अथवा चूर्ण बना लीजिए तथा चूर्ण को एक साफ़ परखनली में डाल दीजिए| उसके बाद परखनली में दस बूँद जल डालकर उसे अच्छी तरह हिलाइए| अब ड्रॉपर की सहायता से परखनली में 2 बूँद कॉपर सल्फेट का विलयन तथा 10 बूँद कास्टिक सोडा का विलयन डालिए और परखनली को एक मिनट के लिए रख दीजिए| परखनली में रखें पदार्थ बैंगनी रंग का हो जाता हैं यह बैंगनी रंग खाद्य पदार्थ में प्रोटीन की उपस्थिति को दर्शाता हैं| 3. वसा के लिए परीक्षण: सबसे पहले खाद्य पदार्थ की थोड़ी मात्रा लीजिए| इसे एक कागज़ में रख कर कूटिए| अब कागज़ को सीधा कीजिए और ध्यानपूर्वक देखिए| कागज़ पर तेल की धब्बे दिखाई देने लगेंगे| ये तेल के धब्बे उस खाद्य पदार्थ में वसा की उपस्थिति को दर्शाता हैं| विभिन्न पोषक हमारे शरीर के लिए क्या करते हैं?  1. कार्बोहाइड्रेट: कार्बोहाइड्रेट मुख्य रूप से हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं| कार्बोहाइड्रेट के मुख्य स्रोत: शकरकंद, आलू, पपीता, गन्ना, आम, चावल, गेंहूँ, मक्का बाजरा आदि कार्बोहाइड्रेट का कुछ मुख्य स्रोत हैं| 2. वसा: वसा से भी हमें ऊर्जा मिलती है परन्तु वास्तविकता यह है कि कार्बोहाइड्रेट की तुलना में वसा से हमें अधिक ऊर्जा प्राप्त होती हैं| (i) पौधों से प्राप्त वसा का कुछ मुख्य स्रोत: सरसों तेल, नारियल तेल, सोयाबीन तेल, तिल, मूँगफली, गिरी, सूरजमुखी तेल आदि वसा का कुछ मुख्य स्रोत हैं| (ii) जंतुओं से प्राप्त वसा के मुख्य स्रोत: घी, मछली, माँस, दूध, मक्खन, अंडे आदि वसा से प्राप्त कुछ मुख्य स्रोत हैं| ध्यान देने योग्य बातें: वसा और कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन ‘ऊर्जा देनेवाला भोजन’ कहलाते हैं| प्रोटीन: प्रोटीन की आवश्यकता शरीर की वृद्धि तथा स्वस्थ रहने के लिए होती है प्रोटीन युक्त भोजन को प्राय: शरीर वर्धक भजन कहते हैं|   प्रोटीन के मुख्य  स्रोत: प्रोटीन के मुख्य स्रोत पौधे तथा जन्तुएँ हैं-   (i) पौधों से प्राप्त प्रोटीन के मुख्य स्रोत: चना, मूँग, तुअर, राजमा, सोयाबीन, मटर आदि पौधों से प्राप्त प्रोटीन के कुछ मुख्य स्रोत हैं|   (ii) जंतुओं से प्राप्त प्रोटीन के मुख्य स्रोत: माँस, मछली, पनीरतो, अंडा, दूध आदि जंतुओं से प्राप्त प्रोटीन के कुछ मुख्य स्रोत है|   विटामिन: विटामिन रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं विटामिन हमारी आँख, अस्थियों, दाँतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में भी सहायता करते हैं| विटामिन कई प्रकार के होते है जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता हैं| जैसे- विटामिन-A, विटामिन-B, विटामिन-C, विटामिन-D, विटामिन-E तथा विटामिन-K के नाम से जाना जाता हैं|   ध्यान देने योग्य बातें: (i) विटामिन-B के एक समूह को विटामिन-B काम्प्लैक्स  कहते है| इनमें विटामिन-B1, विटामिन-B2, विटामिन-B3, विटामिन-B5, विटामिन-B6, विटामिन-B7, विटामिन-B9 और विटामिन-B12 सामिल रहते हैं| (ii) हमारे शरीर को सभी प्रकार के विटामिनों की अल्प मात्रा में आवश्यकता होती हैं|   विभिन्न विटामिनों के कार्य तथा उनका मुख्य स्रोत:   (i) विटामिन-A: विटामिन-A हमारी त्वचा तथा आँखों को स्वस्थ रखता हैं| विटामिन-A के मुख्य स्रोत: मछली तेल, आम, दूध, गाजर, पपीता आदि विटामिन-A के कुछ मुख्य स्रोत हैं|   (ii) विटामिन-B: ऊर्जा प्रदान करना, रक्त निर्माण, पाचन क्रिया में सुधार, त्वचा, बाल और आँखों को स्वस्थ रखना आदि कार्य करता हैं|   विटामिन-B के मुख्य स्रोत: गेहूँ, चावल और यकृत विटामिन-B के कुछ मुख्य स्रोत हैं|   (iii) विटामिन-C: विटामिन-C बहुत-से रोगों से लड़ने में हमारी सहायता करता हैं|   विटामिन-C के मुख्य स्रोत: संतरा, टमाटर, आँवला, मिर्ची, नींबू, अमरुद आदि विटामिन-C के कुछ मुख्य स्रोत हैं|   (iv) विटामिन-D: विटामिन-D हमारी अस्थियों और दाँतों के लिए कैल्सियम का उपयोग करने में हमारे शरीर की सहायता करता हैं|   विटामिन-D के मुख्य स्रोत: दुध्ह, मक्खन, मछली, अंडा, यकृत आदि विटामिन-D के कुछ मुख्य स्रोत हैं|   (v) विटामिन-E : विटामिन-E हरिर में कोशिकाओं को नुकसान से बचता हैं|   विटामिन-E के मुख्य स्रोत: वनस्पति तेल, बादाम, मूंगफली, हरी सब्जियाँ आदि विटामिन-E के कुछ मुख्य स्रोत हैं|   (vi) विटामिन-K: विटामिन-K खून को जमाने में सहायता करता हैं|   विटामिन-K के मुख्य स्रोत: हरी पत्तेदार सब्जियाँ, पत्ता गोभी, सोयाबीन आदि विटामिन-K के कुछ मुख्य स्रोत हैं|   विभिन्न खनिज लवण तथा उनके स्रोत: हमारे शरीर को खनिज लवणों की आवश्यकता अल्प मात्रा में होती हैं| शरीर के उचित विकास तथा अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए प्रत्येक खनिज लवण आवश्यक हैं|   (i) आयोडीन: यदि शरीर की वृद्धि तथा विकास में सहायता करता है और घेंघा रोग से बचाव करता है और यह थायरॉइड ग्रंथि के हरमों के निर्माण में सहायता करता हैं|   आयोडीन के मुख्य स्रोत: समुद्री मछली, झींगा, केकड़ा, नमक आदि आयोडीन का कुछ मुख्य स्रोत हैं|   (ii) फास्फोरस: यह हड्डियों और दाँतों को मजबूत बनाता हैं|शरीर की वृद्धि और विकास तथा ऊर्जा के निर्माण में सहायता करता हैं| फास्फोरस के मुख्य स्रोत: दूध, अंडा, मछली, दालें और मेवे फास्फोरस के कुछ मुख्य स्रोत हैं| (iii) लौह (आयरन): आयरन हीमोग्लोबिन के निर्माण में सहायक होता

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प्रकाश परावर्तन एवं अपवर्तन || Light-Reflection and Refraction

प्रकाश प्रकाश वह बाह्य (बाहरी) भौतिक कारण है, जिससे हमें किसी वस्तु को देखने की अनुभूति होती हैं|  प्रकाश एक विद्युत चुम्बकीय तरंग भी हैं|  प्रकाश एक ऊर्जा हैं|  निर्वात में प्रकाश का चाल  होता हैं| प्रकाश हमेशा सीधी रेखा में गमन करती हैं| किरण:- प्रकाश के गमन पथ की दिशा को किरण कहते है| प्रकाशपुंज:- किरणों के समूह को प्रकाशपुंज कहते हैं|           यह तीन प्रकार के होते हैं– 1. समानांतर प्रकाशपुंज         2. अभिसारी प्रकाशपुंज        3. अपसारी प्रकाशपुंज  समानांतर प्रकाशपुंज:-जिस प्रकाशपुंज की सभी किरणें समनांतर हो, समानांतर प्रकाशपुंज कहलाता हैं| अभिसारी प्रकाशपुंज :- जिस प्रकाशपुंज की सभी किरणें एक बिंदु पर मिलती हैं, उसे अभिसारी प्रकाशपुंज कहते हैं|इसे संसृत प्रकाशपुंज भी कहा जाता हैं| अपसारी प्रकाशपुंज:- जिस प्रकाशपुंज की सभी किरणें एक बिंदु से निर्गत होकर विभिन्न दिशाओं में फ़ैल जाती हैं, उसे अपसारी प्रकाशपुंज कहते हैं| कुछ महत्वपूर्ण पदार्थ पारदर्शी पदार्थ :-  पदार्थों से होकर प्रकाश आर-पार निकल जाता है, उसे पारदर्शी पदार्थ कहते हैं| जैसे:– काँच, जल, हवा आदि| अपारदर्शी पदार्थ:- जिन पदार्थों से होकर प्रकाश बाहर नहीं निकल पाटा हिं, उसे अपारदर्शी पदार्थ कहते हैं| जैसे:– पत्थर, ईंट, मिट्टी आदि| पारभासी पदार्थ:- जिन पदार्थों से होकर प्रकाश के कुछ अंश बाहर निकल जाता हैं, पारभासी पदार्थ कहलाते हैं| जैसे:– तेल लगा कागज, घिसा हुआ काँच आदि| आत्मदीप्त पदार्थ:- वैसा पदार्थ जो स्वयं प्रकाश उत्सर्जित कहते है, आत्मदीप्त पदार्थ कहलाते है | जैसे:- सूर्य, दीपक, बिजली का बल्ब आदि| अदीप्त पदार्थ:- वैसा पदार्थ जो स्वयं प्रकाश उत्सर्जित नही कहते है परन्तु प्रकाश की उपस्थिति में दिखाई पड़ते है, अदीप्त पदाथ कहलाते है| जैसे:- चाँद, पत्थर, मिटटी आदि| छाया :-    जब प्रकाश के गमन पथ पर कोई अपारदर्शी वास्तु रख दी जाते है तो उसके पीछे एक अँधेरा क्षेत्र बनता हैं, जिसे छाया कहते हैं| प्रकाश का परावर्तन जब प्रकाश किरणे किसी चिकनी और चमकीली सतह से तकड़ा कर अपने हीमाध्यम में लौट जाति है, तब इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते है| नियम: (i) आपतित किरण, प्रवर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर डाला गया अभिलम्ब सभी एक ही तल में होता है| (ii) आपतन कोण, परवतन कोण के बराबर होता है| अर्थात् प्रकाश परावर्तन के प्रकार 1. नियमित परावर्तन और 2. अनियमित परावर्तन  नियमित परावर्तन:- जब प्रकाश की किरणे किसी चकनी और चमकीली सतह से तकड़ा कर नियमित रूप से परावर्तित होती है, तो ऐसे परावर्तन को नियमित परावर्तन कहते है| अनियमित परावर्तन:- जब प्रकाश की किरणे किसी रुखादी या खुरदरी सतह से टकराने के बाद अनियमित रूप से परावर्तित होती है, तो ऐसे परावर्तन को अनियमित परावर्तन कहते है| प्रतिबिम्ब दूर किसी बिंदु वस्तु से आ रही प्रकाश की किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर कटती है या कटती हुई प्रतीत होती है, तब वह बिंदु उस बिंदु वस्तु का प्रतिबिम्ब कहलाता हैं| प्रतिबिम्ब के प्रकार: 1 . वास्तविक प्रतिबिम्ब 2. काल्पनिक प्रतिबिम्ब  1. वास्तविक प्रतिबिम्ब:- दूर किसी बिंदु वस्तु से आ रही प्रकाश की किरणे परावर्तन या अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर कटती है, वह बिंदु उस बिंदु वस्तु का वास्तविक प्रतिबिम्ब  कहलाता है| 2. काल्पनिक प्रतिबिम्ब:- दूर किसी बिंदु वस्तु से आ रही प्रकाश की किरणे परावर्तन या अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर कटती हुई प्रतीत होती है, वह बिंदु उस बिंदु वस्तु का काल्पनिक प्रतिबिम्ब  कहलाता है| दर्पण वह चिकनी और चमकीली सतह जो नियमित रूप से प्रकाश को परावर्तित करती हैं तथा जिसका एक सतह राजतित हो, दर्पण कहलाता हैं| यह तीन प्रकार के होते है- समतल दर्पण   2. गोलीय दर्पण  और 3. परवलयीक दर्पण  1. समतल दर्पण:- जिस दर्पण का परावर्तक सतह समतल होता है, समतल दर्पण कहलाता है| इसका फोकस काल्पनिक होता है| इसके द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी तथा सीधा होता है| प्रतिबिम्ब दर्पण से उतनी ही दूरी पर बनता है जीतनी दूरी पर वस्तु को रखी जाति है| इसमें वस्तु के सामान आकार का प्रतिबिम्ब बनता है| 2. गोलीय दर्पण:- जिस दर्पण का परावर्तक पृष्ठ (सतह) गोलीय होता है, गोलीय दर्पण कहलाता है| यह दो प्रकार के होते है- 1. अवतल दर्पण और 2. उत्तल दर्पण  1. अवतल दर्पण:- जिस दर्पण का परावर्तक सतह धँसा रहता है, अवतल दर्पण कहलाता हैं| इसे अभिसारी दर्पण कहते है| इसके द्वारा बना प्रतिबिम्ब वास्तविक तथा उल्टा होता है| इसका फोकस वास्तविक होता है| इसका फोकस दूरी ऋणात्मक होता हैं| उपयोग:  हजामती दर्पण के रूप में | सोलर (सौर) कुकर में |  छपाई के छोटे-छोटे अक्षरों के पढने के लिए| रोगियों के नाक, कान तथा गले की जाँच के लिए| दंत विशेषज्ञ दाँतों का बड़ा प्रतिबिम्ब देखने के लिए अवतल दर्पण का उपयोग करते हैं| बस, ट्रक, कार आदि वाहनों के आगरा द्वीपों में | 2. उत्तल दर्पण:- 

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