भोजन के घटक || Components Of Food

भोजन क्या हैं?

वे सभी खाद्य पदार्थ जिन्हें हम जीवित रहने, ऊर्जा पाने, शारीर के विकास और टूट-फुट की मरम्मत आदि के लिए खाते हैं परन्तु उससे शरीर को कोई हानि नहीं होता हैं, भोजन कहलाता हैं|

भोजन के मुख्या स्रोत:

भोजन के मुख्य स्रोत पेड़-पौधें तथा जन्तुएँ हैं|

पेड़-पौधों से प्राप्त भोजन:

सब्जी, दाल, चावल, गेहूँ, फल, साक आदि पौधों से प्राप्त भोजन के मुख्या स्रोत हैं|

जंतुओं से प्राप्त भोजन:

दूध, अंडा और माँस जंतुओं से प्राप्त भोजन हैं|

पोषक तत्त्व:

विभिन्न प्रकार के खाद्य सामग्रियों में हमारे शारीर की वृद्धि, विकास,टूट-फुट की मरम्मत, ऊर्जा पाने एवं स्वस्थ रहने के लिए कुछ आवश्यक अवयव होते हैं| इन अवयवों को पोषक-तत्त्व कहते हैं| जैसे- कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन इत्यादि|

पोषक तत्त्व के प्रकार:

पोषक-तत्व सात प्रकार के होते है-

  1. कार्बोहाइड्रेट 2. वसा 3. प्रोटीन      4. विटामिन      5. खनिज-लवण     6. जल     7. आहारी रेशा

विभिन्न खाद्य पदार्थों की जाँच:

1. मंड के लिए परीक्षण:

सबसे पहले खाद्य पदार्थ या कच्ची सामग्री का थोड़ी मात्रा लीजिए| इसमें तनु आयोडीन विलयन की 2 या 3 बूँदें डालिए| खाद्य पदार्थ के रंग में परिवर्तन आयेगा और वह नीला या काला हो जाएगा| यह नीला या काला रंग, मंड की उपस्थिति को दर्शाता हैं|

2. प्रोटीन के लिए परीक्षण:

सबसे पहले खाद्य पदार्थ की थोड़ी मात्रा लीजिए| यदि वह ठोस हैं तो पहले उसका पेस्ट अथवा चूर्ण बना लीजिए तथा चूर्ण को एक साफ़ परखनली में डाल दीजिए| उसके बाद परखनली में दस बूँद जल डालकर उसे अच्छी तरह हिलाइए| अब ड्रॉपर की सहायता से परखनली में 2 बूँद कॉपर सल्फेट का विलयन तथा 10 बूँद कास्टिक सोडा का विलयन डालिए और परखनली को एक मिनट के लिए रख दीजिए| परखनली में रखें पदार्थ बैंगनी रंग का हो जाता हैं यह बैंगनी रंग खाद्य पदार्थ में प्रोटीन की उपस्थिति को दर्शाता हैं|

3. वसा के लिए परीक्षण:

सबसे पहले खाद्य पदार्थ की थोड़ी मात्रा लीजिए| इसे एक कागज़ में रख कर कूटिए| अब कागज़ को सीधा कीजिए और ध्यानपूर्वक देखिए| कागज़ पर तेल की धब्बे दिखाई देने लगेंगे| ये तेल के धब्बे उस खाद्य पदार्थ में वसा की उपस्थिति को दर्शाता हैं|

विभिन्न पोषक हमारे शरीर के लिए क्या करते हैं? 

1. कार्बोहाइड्रेट: कार्बोहाइड्रेट मुख्य रूप से हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं|

कार्बोहाइड्रेट के मुख्य स्रोत:

शकरकंद, आलू, पपीता, गन्ना, आम, चावल, गेंहूँ, मक्का बाजरा आदि कार्बोहाइड्रेट का कुछ मुख्य स्रोत हैं|

2. वसा: वसा से भी हमें ऊर्जा मिलती है परन्तु वास्तविकता यह है कि कार्बोहाइड्रेट की तुलना में वसा से हमें अधिक ऊर्जा प्राप्त होती हैं|

(i) पौधों से प्राप्त वसा का कुछ मुख्य स्रोत:

सरसों तेल, नारियल तेल, सोयाबीन तेल, तिल, मूँगफली, गिरी, सूरजमुखी तेल आदि वसा का कुछ मुख्य स्रोत हैं|

(ii) जंतुओं से प्राप्त वसा के मुख्य स्रोत:

घी, मछली, माँस, दूध, मक्खन, अंडे आदि वसा से प्राप्त कुछ मुख्य स्रोत हैं|

ध्यान देने योग्य बातें:

वसा और कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन ‘ऊर्जा देनेवाला भोजन’ कहलाते हैं|

  1. प्रोटीन: प्रोटीन की आवश्यकता शरीर की वृद्धि तथा स्वस्थ रहने के लिए होती है प्रोटीन युक्त भोजन को प्राय: शरीर वर्धक भजन कहते हैं|

 

प्रोटीन के मुख्य  स्रोत:

प्रोटीन के मुख्य स्रोत पौधे तथा जन्तुएँ हैं-

 

(i) पौधों से प्राप्त प्रोटीन के मुख्य स्रोत:

चना, मूँग, तुअर, राजमा, सोयाबीन, मटर आदि पौधों से प्राप्त प्रोटीन के कुछ मुख्य स्रोत हैं|

 

(ii) जंतुओं से प्राप्त प्रोटीन के मुख्य स्रोत:

माँस, मछली, पनीरतो, अंडा, दूध आदि जंतुओं से प्राप्त प्रोटीन के कुछ मुख्य स्रोत है|

 

  1. विटामिन: विटामिन रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं विटामिन हमारी आँख, अस्थियों, दाँतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में भी सहायता करते हैं| विटामिन कई प्रकार के होते है जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता हैं| जैसे- विटामिन-A, विटामिन-B, विटामिन-C, विटामिन-D, विटामिन-E तथा विटामिन-K के नाम से जाना जाता हैं|

 

ध्यान देने योग्य बातें:

(i) विटामिन-B के एक समूह को विटामिन-B काम्प्लैक्स  कहते है| इनमें विटामिन-B1, विटामिन-B2, विटामिन-B3, विटामिन-B5, विटामिन-B6, विटामिन-B7, विटामिन-B9 और विटामिन-B12 सामिल रहते हैं|

(ii) हमारे शरीर को सभी प्रकार के विटामिनों की अल्प मात्रा में आवश्यकता होती हैं|

 

विभिन्न विटामिनों के कार्य तथा उनका मुख्य स्रोत:

 

(i) विटामिन-A: विटामिन-A हमारी त्वचा तथा आँखों को स्वस्थ रखता हैं|

विटामिन-A के मुख्य स्रोत:

मछली तेल, आम, दूध, गाजर, पपीता आदि विटामिन-A के कुछ मुख्य स्रोत हैं|

 

(ii) विटामिन-B: ऊर्जा प्रदान करना, रक्त निर्माण, पाचन क्रिया में सुधार, त्वचा, बाल और आँखों को स्वस्थ रखना आदि कार्य करता हैं|

 

विटामिन-B के मुख्य स्रोत:

गेहूँ, चावल और यकृत विटामिन-B के कुछ मुख्य स्रोत हैं|

 

(iii) विटामिन-C: विटामिन-C बहुत-से रोगों से लड़ने में हमारी सहायता करता हैं|

 

विटामिन-C के मुख्य स्रोत:

संतरा, टमाटर, आँवला, मिर्ची, नींबू, अमरुद आदि विटामिन-C के कुछ मुख्य स्रोत हैं|

 

(iv) विटामिन-D: विटामिन-D हमारी अस्थियों और दाँतों के लिए कैल्सियम का उपयोग करने में हमारे शरीर की सहायता करता हैं|

 

विटामिन-D के मुख्य स्रोत:

दुध्ह, मक्खन, मछली, अंडा, यकृत आदि विटामिन-D के कुछ मुख्य स्रोत हैं|

 

(v) विटामिन-E : विटामिन-E हरिर में कोशिकाओं को नुकसान से बचता हैं|

 

विटामिन-E के मुख्य स्रोत:

वनस्पति तेल, बादाम, मूंगफली, हरी सब्जियाँ आदि विटामिन-E के कुछ मुख्य स्रोत हैं|

 

(vi) विटामिन-K: विटामिन-K खून को जमाने में सहायता करता हैं|

 

विटामिन-K के मुख्य स्रोत:

हरी पत्तेदार सब्जियाँ, पत्ता गोभी, सोयाबीन आदि विटामिन-K के कुछ मुख्य स्रोत हैं|

 

विभिन्न खनिज लवण तथा उनके स्रोत:

हमारे शरीर को खनिज लवणों की आवश्यकता अल्प मात्रा में होती हैं| शरीर के उचित विकास तथा अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए प्रत्येक खनिज लवण आवश्यक हैं|

 

(i) आयोडीन: यदि शरीर की वृद्धि तथा विकास में सहायता करता है और घेंघा रोग से बचाव करता है और यह थायरॉइड ग्रंथि के हरमों के निर्माण में सहायता करता हैं|

 

आयोडीन के मुख्य स्रोत:

समुद्री मछली, झींगा, केकड़ा, नमक आदि आयोडीन का कुछ मुख्य स्रोत हैं|

 

(ii) फास्फोरस: यह हड्डियों और दाँतों को मजबूत बनाता हैं|शरीर की वृद्धि और विकास तथा ऊर्जा के निर्माण में सहायता करता हैं|

फास्फोरस के मुख्य स्रोत:

दूध, अंडा, मछली, दालें और मेवे फास्फोरस के कुछ मुख्य स्रोत हैं|

(iii) लौह (आयरन): आयरन हीमोग्लोबिन के निर्माण में सहायक होता हैं तथा शरीर में ऑक्सीजन के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं|

आयरन के मुख्य स्रोत:

गुड़, चुकंदर, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, किशमिश आदि आयरन के कुछ मुख्य स्रोत हैं|

 

कैल्सियम: यह हड्डियों और दाँतो को मजबूत बनाता है और हृदय की धडकन को सामान्य बनाए रखता है| शरीर की वृद्धि, विकास तथा मांसपेशियों को संकुचन में सहायता करता हैं|

 

कैल्सियम के मुख्य स्रोत:

दूध, पनीर, सोयाबीन, बादाम, पालक, मेथी आदि कैल्सियम के कुछ मुख्य स्रोत हैं|

 

संतुलित आहार:

हमारे शरीर की वृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए हमारे आहार में वे सभी पोषक तत्त्व उचित मात्रा में होने चाहिए जिनकी हमारे शरीर को आवश्यकता हैं| कोई भी पोषक तत्त्व न आवश्यकता से अधिक हो और न ही कम | ऐसे आहार को संतुलित आहार कहते हैं|

 

ध्यान देने योग्य बातें:

(i) यदि भोजन पकाने में अत्यधिक जल का उपयोग किया जाता हैं और बाद में उसे फेंक दिया जाता हैं तो कई लाभदायक प्रोटीन तथा खनिज-लवणों की हानि हो जाती हैं क्योंकि पकाने पर विटामिन-C गर्मी से नष्ट हो जाता हैं|

(ii) विटामिन-C जल में घुलनशील होता हैं|

 

कुपोषण:

जब शरीर को आवश्यक मात्रा में पोषक-तत्व युक्त पदार्थ नहीं मिलते हैं तब इस स्थिति को कुपोषण कहते हैं|

 

अतिपोषण: जब कोई व्यक्ति आवश्यकता से अधिक भोजन केरता है और शरीर को जरुरत से ज्यादा पोषक-तत्व मिलने लगते हैं, तो उसे अतिपोषण कहते हैं|

 

मोटापा क्या हैं?

शरीर में आवश्यकता से अधिक चर्बी जमा हो जाने की अवस्था को मोटापा कहते हैं|

 

ध्यान देने योग्य बातें:

अधिक वसायुक्त भोजन खाना हमारे लिए बहुत हानिकारक हो सकता हैं| हमारे भोजन में वसा की मात्रा अत्यधिक मोटापे का कारण बनती हैं|

 

अभावजन्य रोग:

वे रोग जो लम्बी अवधि तक पोषकों के अभाव के कारण होते हैं, उन्हें अभावजन्य रोग कहते हैं| जैसे- रतौंधी, बेरी-बेरी, स्कर्वी, आदि|

 

ध्यान देने योग्य बातें:

संतुलित आहार लेने से अभी अभावजन्य रोगों की रोकथाम की जा सकती हैं|

 

दूषित भोजन:

भोजन को दूषित होने का मुख्य कारण सूक्षमजीव, धुलकण और दूषित जल हैं| भोजन बनाने में यदि दूषित जल का उपयोग किया जाए तो इससे भी भोजन को दूषित होने का भय रहता हैं| दूषित जल पीने से अतिसार जैसी बिमारियों का भय रहता हैं| जैसे- हैजा, पेचिश, टायफाइड आदि|

 

विटामिन और खनिज लवणों के अभाव के कारण होने वाले कुछ रोग

विटामिन /खनिज अभावजन्य रोग/विकार लक्षण
विटामिन-ए रतौंधी (दृष्टिहीनता) कमजोर दृष्टि, अँधेरे (रात) में कम दिखाई देना, कभी-कभी पूरी तरह से दिखाई देना बंद हो जाना|
विटामिन-बी बेरी-बेरी दुर्बल पेशिया और काम करने की ऊर्जा में कमी
विटामिन-सी स्कर्वी मसूड़ों से खून निकलना, घाव भरने में अधिक समय लगना
विटामिन-डी रिकेट्स अस्थियों का मुइलायम होकर मुड़ जाना
कैल्सियम अस्थियाँ एवं दंतक्षय कमजोर अस्थियाँ, दंतक्षय
आयोडीन घेंघा (गॉयटर) गर्दन की ग्रंथि का फूल जाना, बच्चों में मानसिक विकलांगता
लौह अल्प रक्तता (एनीमिया) कमजोरी, रक्त की कमी

 

 

 

 

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