प्रकाश
प्रकाश वह बाह्य (बाहरी) भौतिक कारण है, जिससे हमें किसी वस्तु को देखने की अनुभूति होती हैं|
- प्रकाश एक विद्युत चुम्बकीय तरंग भी हैं|
- प्रकाश एक ऊर्जा हैं|
- निर्वात में प्रकाश का चाल \( 3\times 10^8 m/s \) होता हैं|
- प्रकाश हमेशा सीधी रेखा में गमन करती हैं|
किरण:- प्रकाश के गमन पथ की दिशा को किरण कहते है|
प्रकाशपुंज:-
किरणों के समूह को प्रकाशपुंज कहते हैं|
यह तीन प्रकार के होते हैं–
1. समानांतर प्रकाशपुंज 2. अभिसारी प्रकाशपुंज 3. अपसारी प्रकाशपुंज
समानांतर प्रकाशपुंज:-जिस प्रकाशपुंज की सभी किरणें समनांतर हो, समानांतर प्रकाशपुंज कहलाता हैं|
अभिसारी प्रकाशपुंज :-
जिस प्रकाशपुंज की सभी किरणें एक बिंदु पर मिलती हैं, उसे अभिसारी प्रकाशपुंज कहते हैं|इसे संसृत प्रकाशपुंज भी कहा जाता हैं|
अपसारी प्रकाशपुंज:-
जिस प्रकाशपुंज की सभी किरणें एक बिंदु से निर्गत होकर विभिन्न दिशाओं में फ़ैल जाती हैं, उसे अपसारी प्रकाशपुंज कहते हैं|
कुछ महत्वपूर्ण पदार्थ
पारदर्शी पदार्थ :- पदार्थों से होकर प्रकाश आर-पार निकल जाता है, उसे पारदर्शी पदार्थ कहते हैं| जैसे:– काँच, जल, हवा आदि|
अपारदर्शी पदार्थ:- जिन पदार्थों से होकर प्रकाश बाहर नहीं निकल पाटा हिं, उसे अपारदर्शी पदार्थ कहते हैं| जैसे:– पत्थर, ईंट, मिट्टी आदि|
पारभासी पदार्थ:- जिन पदार्थों से होकर प्रकाश के कुछ अंश बाहर निकल जाता हैं, पारभासी पदार्थ कहलाते हैं| जैसे:– तेल लगा कागज, घिसा हुआ काँच आदि|
आत्मदीप्त पदार्थ:- वैसा पदार्थ जो स्वयं प्रकाश उत्सर्जित कहते है, आत्मदीप्त पदार्थ कहलाते है | जैसे:- सूर्य, दीपक, बिजली का बल्ब आदि|
अदीप्त पदार्थ:- वैसा पदार्थ जो स्वयं प्रकाश उत्सर्जित नही कहते है परन्तु प्रकाश की उपस्थिति में दिखाई पड़ते है, अदीप्त पदाथ कहलाते है| जैसे:- चाँद, पत्थर, मिटटी आदि|
छाया :-
जब प्रकाश के गमन पथ पर कोई अपारदर्शी वास्तु रख दी जाते है तो उसके पीछे एक अँधेरा क्षेत्र बनता हैं, जिसे छाया कहते हैं|
प्रकाश का परावर्तन
जब प्रकाश किरणे किसी चिकनी और चमकीली सतह से तकड़ा कर अपने हीमाध्यम में लौट जाति है, तब इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते है|
नियम:
(i) आपतित किरण, प्रवर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर डाला गया अभिलम्ब सभी एक ही तल में होता है|
(ii) आपतन कोण, परवतन कोण के बराबर होता है| अर्थात् \( \angle i= \angle r \)
प्रकाश परावर्तन के प्रकार
1. नियमित परावर्तन और 2. अनियमित परावर्तन
- नियमित परावर्तन:- जब प्रकाश की किरणे किसी चकनी और चमकीली सतह से तकड़ा कर नियमित रूप से परावर्तित होती है, तो ऐसे परावर्तन को नियमित परावर्तन कहते है|
- अनियमित परावर्तन:- जब प्रकाश की किरणे किसी रुखादी या खुरदरी सतह से टकराने के बाद अनियमित रूप से परावर्तित होती है, तो ऐसे परावर्तन को अनियमित परावर्तन कहते है|
प्रतिबिम्ब
दूर किसी बिंदु वस्तु से आ रही प्रकाश की किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर कटती है या कटती हुई प्रतीत होती है, तब वह बिंदु उस बिंदु वस्तु का प्रतिबिम्ब कहलाता हैं|
प्रतिबिम्ब के प्रकार:
1 . वास्तविक प्रतिबिम्ब 2. काल्पनिक प्रतिबिम्ब
1. वास्तविक प्रतिबिम्ब:- दूर किसी बिंदु वस्तु से आ रही प्रकाश की किरणे परावर्तन या अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर कटती है, वह बिंदु उस बिंदु वस्तु का वास्तविक प्रतिबिम्ब कहलाता है|
2. काल्पनिक प्रतिबिम्ब:- दूर किसी बिंदु वस्तु से आ रही प्रकाश की किरणे परावर्तन या अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर कटती हुई प्रतीत होती है, वह बिंदु उस बिंदु वस्तु का काल्पनिक प्रतिबिम्ब कहलाता है|
दर्पण
वह चिकनी और चमकीली सतह जो नियमित रूप से प्रकाश को परावर्तित करती हैं तथा जिसका एक सतह राजतित हो, दर्पण कहलाता हैं|
यह तीन प्रकार के होते है-
- समतल दर्पण 2. गोलीय दर्पण और 3. परवलयीक दर्पण
1. समतल दर्पण:- जिस दर्पण का परावर्तक सतह समतल होता है, समतल दर्पण कहलाता है|
- इसका फोकस काल्पनिक होता है|
- इसके द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी तथा सीधा होता है|
- प्रतिबिम्ब दर्पण से उतनी ही दूरी पर बनता है जीतनी दूरी पर वस्तु को रखी जाति है|
- इसमें वस्तु के सामान आकार का प्रतिबिम्ब बनता है|
2. गोलीय दर्पण:- जिस दर्पण का परावर्तक पृष्ठ (सतह) गोलीय होता है, गोलीय दर्पण कहलाता है|
यह दो प्रकार के होते है-
1. अवतल दर्पण और 2. उत्तल दर्पण
1. अवतल दर्पण:- जिस दर्पण का परावर्तक सतह धँसा रहता है, अवतल दर्पण कहलाता हैं|
- इसे अभिसारी दर्पण कहते है|
- इसके द्वारा बना प्रतिबिम्ब वास्तविक तथा उल्टा होता है|
- इसका फोकस वास्तविक होता है|
- इसका फोकस दूरी ऋणात्मक होता हैं|
उपयोग:
- हजामती दर्पण के रूप में |
- सोलर (सौर) कुकर में |
- छपाई के छोटे-छोटे अक्षरों के पढने के लिए|
- रोगियों के नाक, कान तथा गले की जाँच के लिए|
- दंत विशेषज्ञ दाँतों का बड़ा प्रतिबिम्ब देखने के लिए अवतल दर्पण का उपयोग करते हैं|
- बस, ट्रक, कार आदि वाहनों के आगरा द्वीपों में |
2. उत्तल दर्पण:-